
विषय: शिवमास
विधा: दुर्मिल सवैया।
मन भावन ये शिव मास सखे,बरखा ऋतु का मधुमास रहे।
कर जोड़ उपासक आस लखे,रख भाव सदा चित ध्यान कहे।
रख काँवर भक्त उठा कर में,पग ध्वनि करें बम बोल बहे,
तपती धरती पर सावन आ,कर शीतल पावन जोश ढहे।
शिव नाम जपो सुख धाम सखे,मन में सत ध्यान रहे गुन के,
कर निश्छल प्रेम पदाम्बुज में,रख ध्यान कपाट खुले मन के।
विनती कर शंकर शंभु सुने,सब द्वार भुला रखना धन के,
भवसागर पार उतार प्रभो,लख ओर हमार गरीबन के।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार



