E-Paperसाहित्य रचना
RCCPL की खदानें: क्या DGMS के सुरक्षा नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं?

- RCCPL की खदानें: क्या DGMS के सुरक्षा नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं?
- मैहर आज देश के प्रमुख सीमेंट हब के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। यहां प्रचुर मात्रा में चूना पत्थर (लाइमस्टोन) उपलब्ध है, जिसके कारण अनेक सीमेंट कंपनियां और दर्जनों खदानें संचालित हो रही हैं। खनिज संपदा से समृद्ध यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा प्रश्न भी जुड़ा है—क्या इन खदानों में सुरक्षा और श्रमिकों के स्वास्थ्य से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन हो रहा है?
- खनन उद्योग में सुरक्षा की निगरानी का दायित्व भारत सरकार के खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) का है, जो खदानों में कार्यरत श्रमिकों के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कानूनों और नियमों का अनुपालन कराता है।
- यदि किसी खदान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है, तो इसका सबसे बड़ा खतरा वहां काम करने वाले मजदूरों, मशीन ऑपरेटरों और आसपास रहने वाले लोगों पर पड़ता है।
- *DGMS के प्रमुख सुरक्षा नियम*
- खदान की बेंच (Bench) वैज्ञानिक ढंग से बनाई जाएं तथा उनकी ऊंचाई और चौड़ाई निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।
- ढलानों (Slopes) का सुरक्षित कोण रखा जाए, ताकि भूस्खलन या दीवार धंसने जैसी दुर्घटनाएं न हों।
- हॉल रोड (Haul Road) पर्याप्त चौड़ी, समतल और सुरक्षित हो, जिससे भारी वाहन सुरक्षित आवागमन कर सकें।
- ब्लास्टिंग निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया और मानकों के अनुरूप की जाए।
- सभी श्रमिकों को हेलमेट, सेफ्टी शूज़, रिफ्लेक्टिव जैकेट, दस्ताने, सुरक्षा चश्मा तथा अन्य आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) उपलब्ध कराए जाएं।
- खदान में प्रशिक्षित प्रबंधक, पर्यवेक्षक तथा आपातकालीन बचाव व्यवस्था उपलब्ध हो।
- *श्रमिकों के स्वास्थ्य के लिए क्या कहते हैं नियम?*
- सुरक्षा के साथ-साथ श्रमिकों का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। खनन कार्य में धूल, शोर, कंपन और भारी मशीनों के बीच काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नियमित स्वास्थ्य निगरानी आवश्यक मानी जाती है।
- इसी कारण खदानों में कार्यरत श्रमिकों का समय-समय पर चिकित्सकीय परीक्षण (Medical Examination) कराया जाना चाहिए। आवश्यकता के अनुसार योग्य चिकित्सक (Medical Officer/Doctor) की उपलब्धता, प्राथमिक उपचार केंद्र (First Aid Centre), एम्बुलेंस या आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था तथा दुर्घटना की स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था होना भी महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रबंधों का हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा धूल से होने वाली फेफड़ों की बीमारियों, सुनने की क्षमता पर प्रभाव और अन्य व्यावसायिक रोगों की नियमित जांच भी की जानी चाहिए।
- अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या RCCPL की सभी लाइमस्टोन खदानों में इन सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं का पूरी तरह पालन हो रहा है? क्या प्रत्येक श्रमिक का नियमित मेडिकल चेकअप कराया जाता है? क्या खदान परिसर में डॉक्टर या चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है? क्या प्राथमिक उपचार केंद्र और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावी रूप से संचालित है?
- यदि कहीं बेंच निर्धारित मानकों से अधिक ऊंची हैं, ढलान असुरक्षित हैं, सुरक्षा उपकरणों का अभाव है या स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
- खनिज संपदा से विकास होना चाहिए, लेकिन विकास की कीमत श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य नहीं हो सकती। मैहर जैसे खनन क्षेत्र में यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि DGMS, खनिज विभाग और संबंधित कंपनियां सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी सभी मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें तथा समय-समय पर निरीक्षण और स्वास्थ्य व्यवस्था की जानकारी भी सार्वजनिक करें।




