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शीर्षक : हरित सावन का शिव-आशीष

शीर्षक : हरित सावन का शिव-आशीष

 

सावन आया, हरित धरा पर खुशियों का विस्तार।

शिव-कृपा से महके जग में, जीवन हो साकार।।

 

घन-घोर घटाएँ नभ में छाईं, रिमझिम बरसे नीर,

भीगी माटी की सौंधी खुशबू, हर ले मन की पीर।

 

वन-उपवन नव रूप सजाएँ, कोंपल हँसती जाए,

मोर पंख फैलाकर नाचे, कोयल गीत सुनाए।

 

कल-कल करती नदियाँ बहतीं, झरने छेड़ें तान,

धरती ओढ़े हरित चुनरिया, पाकर नव सम्मान।

 

धान की बाली लहर-लहर कर, श्रम का मान बढ़ाए,

किसानों के श्रम से जग में, सुख-समृद्धि मुस्काए।

 

मंद समीर प्रेम का संदेशा, जन-जन तक पहुँचाए,

प्रकृति-माता का हर उपवन, जीवन-गीत सुनाए।

 

भोले शंकर कृपा बरसाएँ, मंगलमय संसार,

हर-हर महादेव गूँज उठे, मिटे सभी अंधकार।

 

वृक्ष लगाएँ, जल बचाएँ, यह संकल्प निभाएँ,

जल-जंगल और जीव सभी का, मिल संरक्षण पाएँ।

 

सावन, शिव और सुरम्य प्रकृति, अनुपम पावन दान,

प्रकृति-प्रेम ही सच्चा धन है, यही श्रेष्ठ सम्मान।

 

हरित धरा पर प्रेम खिले, मन में हो सत्कार,

शिव-कृपा से धन्य बने यह सुंदर सारा संसार।।

 

स्वरचित 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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