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पावन मास सावन

03/08/26, शुभ सोमवार

     ॐ नमः शिवाय

पावन मास सावन

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पावन मास सावन है आया,  

चलो चलो बाबा के धाम।  

उनको चढ़ाएं गंगा जल की धारा,  

और मन से लगाएं जयकारा।  

 

थोड़े से बेलपत्र ले लो हाथ में,  

उन पर “श्री राम” लिख दो प्रेम से।  

भक्तिभाव से अपने करों से,  

चढ़ा दो भोले के शीश पर प्यार से।  

 

मान्यता ऐसी सुनी है पुरानी,  

जब देवों-असुरों ने सागर मथा था।  

उसमें से निकला हलाहल विष भारी,  

सारा संसार डर से कांप उठा था।  

 

तब दयालु शिव शम्भू आगे आए,  

जगत की रक्षा को विष पी गए।  

विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ा,  

तभी से भोलेनाथ “नीलकंठ” कहलाए।  

 

विष की जलन से व्याकुल हुए भोले,  

उनकी बैचेनी दूर करने को,  

सबसे पहले रावण ने कांवड़ उठाई।  

अपने कांवड़ में गंगाजल भर लाया,  

और शिवलिंग पर अर्पित कर आया।  

तब जाकर शिव का ताप शांत हुआ,  

उनका कष्ट धीरे-धीरे कम हुआ।  

 

उसी दिन से चली ये परंपरा,  

कांवड़ यात्रा की पावन धारा।  

पावन मास सावन में हर वर्ष,  

लाखों भक्त चलते हैं बाबा के द्वार।  

 

कंधे पर कांवड़, मुख में “बोल बम”,  

पैरों में छाले, दिल में राम।  

एक बूंद जल और एक बेलपत्र से,  

भोले प्रसन्न हो जाते हैं।  

 

हर हर महादेव का नारा गूंजे,  

सावन की फुहार संग भक्ति बरसे।  

जो भी सच्चे मन से शीश झुकाए,  

भोले उसकी झोली खुशियों से भर जाएं।  

🙏🏻🙏🏻

हर हर महादेव 🔱🌧️

✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास

        मुम्बई

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