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शीर्षक:–ऐ दोस्त

शीर्षक:–ऐ दोस्त
ऐ दोस्त मेरे लौट तु आ।
जो तु गया जग रुठ गया
सूना सूना गलियाँ लागें
सूनी सूनी लगें राहें।
मधुवन भी खाली खाली सा
मौसम भी जैसे रुठ गया
थम सा गया सूरज चंदा
ऐ दोस्त मेरे लौट तु आ।।
पहले सा कोयल की कूक नहीं
जमुना की लहरें गाती नहीं।
पहले सा सावन बरसता नहीं
दिवाली में उल्लास नहीं
अँधेरा चहूँओर फैला
दीपों में जैसे प्रकाश नहीं
होली के रंग में उमंग नहीं
होली न दिवाली रास आया
ऐ दोस्त मेरे लौट तु आ।।
राहों में पलकें बिछायें अँखियाँ
तेरी बाट निहारुँ दिन रतियाँ
मथुरा जब से तु कृष्ण गया
तन्हा तन्हा सब सखा हुआ
गईया भी दूध देती नहीं।
मुरझाई हर कलियाँ यहाँ।
ऐ कृष्ण मेरे सखा मेरे
वृंदावन में लौट तु आ
ऐ दोस्त मेरे लौट तु आ।।
स्वरचित:–डॉ अनुपम भारद्वाज मिश्रा




