
मौसम सितम के
मौसम सितम का हाल है ये ,
हर दिन रंग बदलते रहते ।
कभी गर्मी बढाए ,
कभी पानी बरसाए ।
कभी आंधी लाए ,
कभी मनमौजी करते ।
कभी ओला तो कभी तूफान लाते ,
जीना मुहाल हुआ व्यक्ति के ।
गरमी इतनी बढ़ती,
तापमान आज 45% हो गये ।
लगे जैसे अंगारो पर खड़े,
तापमान बढ़ते ही जा रहे ।
अब कितना सितम मौसम का सहे ,
बढते ही जा रहे तापमान मौसम के ।
हर जीव परेशान है ,
गर्म गर्म हवाओ से ।
कितना पसीना वह रहे शरीर से ,
जम रहे है धूल कण बदन पे ।
जब पानी बरसा ठंढ बढी ,
दूवके रहे घरो मे ।
जब आंधी चली तो ,
धूल भर गए आंखों मे ।
ओले पड़े तो जी जन्तु परेशान हो गए,
वृक्ष टूट टूट कर धरती पर गिरे ।
सभी पक्षी बेहाल हुए,
शरण की खोज मे ।
मौसम ने अपना सितम बहुत ढाए ,
जब लू चली जोरो की ।
जीव जन्तु बेहाल हुए ,
दाने दाने के लिए तरस गये ।
नदी नाले कुएँ सूख रहे ,
पानी के लिए हाहाकार मचा रहे ।
जीव जन्तु पेड़ पौधे सभी झूलस रहे ।
इस मौसम मे कोई क्या करें ,
अब हे कृपा निधान कृपा करें ।
और अब कितना सहें सितम मौसम के।
नीलम पर प्रभा सिन्हा




