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“चलते रहो पथिक”

01/08/26, शनिवार

“चलते रहो पथिक”

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    ए पथिक !  

तुम रुक न जाना…..

धूल लगे तो पांव धो लेना  

पर मंज़िल से मत नजर हटाना,  

आंधी आए तो पल भर रुक जाना ,

पर हौसले की डोर को मजबूत बनाना,

 

एक हार को हार मत मानना ,

एक हार से हार मत जाना,

हर हार एक नई सीख बतलाती है,  

गिर कर उठने वाला ही ,

सच में आगे जाता है ,

 

पथ में कंकड़ भी मिलेंगे ,

कांटे भी राह रोकेंगे ,

पर इन सब पर चल कर ही  

तेरा पथ प्रेरक बनेगा ,

 

थक जाओ तो सांस ले लेना ,

पर बहुत देर मत ठहरना ,

कहीं पथ ही आगे निकल न जाए ,

और तू पीछे ही रह जाए ,

 

क्योंकि पथ तेरा कर रहा इंतज़ार,

और तू ही उसका पथिक है ,

जब तक मंज़िल न मिले  

चलते रहना है… 

बस चलते रहना है …

✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास

       मुम्बई

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