
गुरु पूर्णिमा पर विशेष
शीर्षक:– गुरु महिमा
अँधेरा मिटाकर जो पथ रोशन करें ।
ज्ञान की ज्योति जलायें जो जीवन में।।
पथ प्रशस्त करें मार्गप्रदर्शक बनें।
छल कपट स्वार्थ भाव से हैं परे
हर कदम पर चलना आगे बढ़ना सिखायें।
शब्दकोश में हार नहीं जिसके
आदमी को मानव बनाए गुरु
गोविंद का जिसने ज्ञान दिया
गोविंद से बढ़कर होतें हैं गुरु
नमन मै करूँ चरण वंदन करूँ
गुरु ब्रह्मा विष्णु महेश होतें
सृजक और सृजनकार होतें।।
गुरु पालक पालनहार होतें
बुराई मिटा जीवन सँवार देतें।
अँधेरे से निकाल उजाला मन में करें।
मझधार मे गुरु खेवनहार बनें
विकार दूर करें चक्षुद्वार खोलें
भक्ति भाव भरें नैया पार करें।।
गुरु महिमा का गुणगान कितना करें
जितना भी करें शब्द कम पड़ गए।।
गुरु से बढ़कर न कोई जग में हुआ।
प्रथम गुरु माँ जिसने जीवन दिया।
अक्षर ज्ञान दिया पथ पर बढ़ना सिखाया।
नमन हैं गुरु तुझे हर रुप में
तुझसे मेरा जीवन साकार हुआ।।
स्वरचित:–डॉ अनुपम भारद्वाज मिश्रा




