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गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा
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### *शीर्षक: “ज्ञान के सागर मेरे गुरु”*
गुरु ज्ञान के सागर हैं
उसमें डुबकी लगाते हैं
अपने तिमिर को दूर कर
ज्ञान दीप जलाते हैं।
तेरे ही चरणों में श्रद्धा
मस्तक झुकाते हैं
ज्ञान दीप लेकर हम
आगे बढ़ते जाते हैं।
गुरु बिन ज्ञान न हो प्रकाश
तुम ही धरती तुम ही आकाश
सुमिरन करो निशदिन गुरु को
जो तेरे तमको दूर करे
श्रद्धा सुमन अर्पित करो
पावन मन ही गुरुदक्षिणा को दान करो।
*निष्कर्ष:*
_गुरु ही जीवन, गुरु ही मुक्ति_
_गुरु के बिना सब है रिक्ति_
_उनके चरणों में कोटि प्रणाम_
_गुरु पूर्णिमा का यही है पैगाम ॥
✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास
मुंबई


