बारिश

बारिश
ओ… ओ… ओ… ओ… ओ…
आया सावन बूँदों के साथ,
रिमझिम रिमझिम बरसे बरसात।
काली घटाएँ छाई चारों ओर,
हरियाली ने ओढ़ी नई-सी चादर।
ठंडी ठंडी मस्त हवाएँ चलीं,
महक उठी धरती का कण कण।
ऐसे सुहाने मौसम में
तेरा चेहरा याद आता है हर पल।
मेरे लबों पर हर घड़ी
बस तेरा ही नाम रहता है।
मन करता है आज तुझे
अपनी बाँहों में भर लूँ,
इन रिमझिम फुहारों के संग
तेरे साथ कुछ पल जी लूँ।
सावन हर बार
अनगिनत यादें साथ ले आता है,
सूने मन के आँगन में
नई उमंगों का दीप जलाता है।
बीते हुए वे प्यारे लम्हे
फिर आँखों के सामने आ जाते हैं,
यादों के झूलों में बैठकर
मन फिर बचपन सा मुस्काता है।
आओ मिलकर मनाएँ यह सावन,
हर ग़म, दुःख और पीड़ा भूल जाएँ।
प्रेम, विश्वास और अपनापन लेकर
एक दूजे के और करीब आएँ।
सावन की मिठास
जीवन में यूँ ही घुलती रहे,
हर रिश्ता प्रेम से महकता रहे,
हर हृदय स्नेह से खिलता रहे।
सूना आँगन हँसी से भर जाए,
घर का हर कोना मुस्काए।
बरसती बूँदें यही संदेश सुनाएँ
प्रेम ही जीवन का सबसे सुंदर गीत है।
हर वर्ष सावन यूँ ही आए,
नई आशाएँ और खुशियाँ लाए।
हर दिल में प्रेम का दीप जले,
और जीवन सदा मुस्कुराए।
— नीलम प्रभा सिन्हा




