E-Paperसाहित्य रचना

श्री हरि शयनी मोक्षदायिनी

श्री हरि शयनी मोक्षदायिनी

 

आषाढ़ शुक्ल एकादशी को,  

चातुर्मास की शुभ बेला आई।  

हरि शयन को क्षीरसागर गये,  

धरती पर शिव भक्ति बढ़ाई।

 

एकादशी पावन दिवस आयो,

हरि शयनी की रात सुहानी,

रात्रि मनन,चिंतन, हरि कीर्तन,

रिमझिम रिमझिम बरसे पानी।

 

आज से चातुर्मास शुरु है,

मंगल कार्य सब थम जायेंगे।

मन के मंदिर में दीप जलें,

हरि कीर्तन, भजन गायेंगे।

 

चार महीने प्रभु विश्राम करेंगे,  

योगनिद्रा में हरि लीन रहेंगे।  

तुलसी संग शंख-चक्र धारी,  

शेष सैया पर हरि शयन करेंगे।

 

मांगलिक काम सब बंद रहेंगे, 

चार मास सब जाप करेंगे।  

गरज,गरज बरसेंगे बादल 

हरि बैकुंठ में शयन करेंगे।

 

दीप जलाओ, कीर्तन गाओ,  

एकादशी का व्रत निभाओ।  

पाप भगाओ, पुण्य बढ़ाओ,  

हरि कृपा से मोक्ष को पाओ।

 

कार्तिक में जब देव उठेंगे,  

देवउठनी ,ग्यारस आएगी।  

तब तक सुमिरन करते रहना,  

हरि की कृपा बरस जाएगी।

 

    चन्द्रकला शर्मा 

    प्रधान पाठक 

बेमेतरा छत्तीसगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!