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चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर

चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर

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तेईस जुलाई उन्नीस सौ छ: जन्में,

चन्द्रशेखर तिवारी बनें “आजाद”।

जिला अलीराजपुर ग्राम भाबरा है,

मध्यप्रदेश में ‘आज़ाद नगर’ आज।।

 

आदिवासी भील बच्चों संग अपना,

धनुष-बाण चलाते बिताए बचपन।

उम्र पंद्रह असहयोग आंदोलन जुड़े,

जेल गए जवान सीना लेकर छप्पन।।

 

स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक-महान,  

अलग थी क्रांतिकारियों में पहचान।

कसम खाई अंग्रेजों के हाथों जिंदा, 

नहीं पकड़े जाऍ बस यही अरमान।।

 

गिरफ्तारी में नाम लिखाए’आज़ाद’,

पिता का नाम स्वतंत्रता,पता ‘जेल’।

पंद्रह कोड़े से भारत माता की जय,

उद्घोष जाॅंबाज आजाद के थे खेल।।

 

चौरी-चौरा घटना से,क्रांतिकारी बनें,

राम प्रसाद बिस्मिल,भगत सिंह खास।

गाँधीजी द्वारा,असहयोग आंदोलन के, 

वापस लेने से,आज़ाद हुए थे निराश।

 

प्रमुख कमांडर-इन-चीफ भारतीय,

समाजवादी प्रजातांत्रिक संघ बनें।

लाला लाजपत राय मौत के बदले,

सांडर्स हत्याकांड,योजना को बुनें ।।

 

सत्ताईस फरवरी उन्नीस सौ इक्त्तीस, 

अंतिम क्षण , शहादत का दिन था।

गद्दार की मुखबिरी से,घेरे दुश्मन ने,

सुखदेव रक्षित पर,वक्त कठिन था।

 

अंग्रेजों का डटकर, किए मुकाबला, 

गोलीबारी से, पिस्तौल में गोली एक।

खुद को गोली मार,वीरगति प्राप्त हुए,

अंग्रेजों के हाथ न मरें,प्रतिज्ञा था नेक।।

 

अमर शहीद साहस,अभिमान प्रतीक,

बलिदान,देशभक्ति के,रहेंगे जिंदाबाद।

प्रेरणा लेकर हम,राष्ट्र निर्माण के लिए,

सदा याद रखेंगे, चन्द्रशेखर आज़ाद।।

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स्वरचित मौलिक रचना संग

सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यर्थी”

तालपुरी भिलाई छत्तीसगढ़ 

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