E-Paperसाहित्य रचना
दिल की आवाज

विषयः दिल की आवाज
स्री निभाती है सारे नाते जीवनमे
पिता_माता,सास_ससुर,माॅता,पत्नी
सारे घरके नाते निभाती है प्यारसे
लेकिन कोई खूनका रिश्ता निभाता नही ||१||
मयकेमे बचपनका प्यार देते है
शादीके बात सब पराये हो जाते है
जहाॅं छोड गयीथी सारे यादे
कभी याॅंदे ढुॅंढने आती तो गुॅंमकर देते ||२||
पतीकी मनमानी,झगडना,अपमानित करना
जिसके घाव दिखते नही मगर
खून बहेताही रहेता है
उसका अधिकार जजता नही उसे ||३||
पुरुषकी मर्दानगी आडे आती है
शिक्षा संस्कार नही सिखाती
पढाहुआ उच्च विद्याविभूषित
सब छोडके करता है अवमान ||४||
गालियोंसे भर देता है उसकी झोली
घर,बाहर भले समाज के सामने
पछतावा करती नारी अपने नारीपनका
जो कोई नारी के दिल की सुनले आवाज ||५||
नामःडाॅ.अंजली सामंत,जि.पालघर




