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नयी-सी हवा है, नया आसमाँ

नयी-सी हवा है, नया आसमाँ

 

पुरानी सोच को त्यागकर,

नई सोच अपनाना है।

 

जागृत उम्मीदों के उजाले में

वक्त को सही पहचानना है।

ज़िंदगी के अनजान पलों में

विजयी बनकर दिखलाना है।

 

पुरानी सोच को त्यागकर,

नई सोच अपनाना है।

 

बदलेंगे हम, बदलेगी दुनिया—

यह सुंदर ख़्वाबों की दुनिया।

सबसे उपराम रहकर देखेंगे,

जहाँ हो शांति का समाँ।

 

पुरानी सोच को त्यागकर,

नई सोच अपनाना है।

 

सदा उड़ती कला में जाने को

तैयार हो रही हैं जग-आत्माएँ।

समझें ज्ञान की गुप्त राहों को,

हिम्मत से आगे कदम बढ़ाएँ।

 

पुरानी सोच को त्यागकर,

नई सोच अपनाना है।

 

नई सुबह का नया सवेरा

सुखधाम के द्वार खोल देगा।

जहाँ होगी सुखमय नई हवा,

शांति-युक्त होगा नया आसमाँ।

 

पुरानी सोच को त्यागकर,

नई सोच अपनाना है।

अमिता मराठे

लेखिका एवं समाज सेविका 

इंदौर मध्य-प्रदेश

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