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सृजन शब्द:-सत्य और शिव

 

सृजन शब्द:-सत्य और शिव

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  सत्य जीव रुप शिव समाय हैं

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सत्य और शिव अलग नहीं है,

बस ये एक दूजे के पर्याय हैं।

इसलिए भोले नाथ जी सदा,

सत्यं शिवं सुन्दरम् कहाय हैं।।

 

ऊॅं नमः शिवाय मंत्र के जाप,

शिवशंकर को बहुत भाय हैं।

हर-हर महादेव कहें भक्त तो,

त्रिपुरारी मंद मधुर मुस्काय हैं।।

 

सत्य पथ पर चले श्रीराम तो,

महावीर सेवकाई दिखाय हैं।

माता जानकी की खोज कर,

मुंद्रिका दे चूड़ामणि वे लाय हैं।।

 

सत्य अहिंसा परमो धर्म: हमें,

योग मुद्रा बैठ कर सिखाय हैं।

सत्यवादी- सत्कर्मी धरती पर,

औघड़दानी को सदा सुहाय हैं।।

 

सत्य और शिव मे भेद नहीं है,

यही तो शिवपुराण गोहराय हैं।

श्री शिवाय नमस्तुभ्यम् कहते,

त्वरित प्राणी को गले लगाय हैं।।

 

जड़-चेतन में विराजमान शिव,

सत्य ही व्यापक ब्रह्म सुहाय हैं।

सूक्ष्म रुप लखचौरासी अद्भुत,

सत्यमेव जयते बनके समाय हैं।।

 

सत्य और शिव अजर-अमर हैं,

इस हेतु आवागमन लुभाय हैं।

जन्म-मृत्यु बीच सफर शास्वत,

सत्य जीव रुप शिव समाय हैं।।

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स्वरचित मौलिक रचना संग

सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यार्थी”

सेवानिवृत्त प्रबंधक

(भिलाई इस्पात संयंत्र)

समाज सेवी/ साहित्यकार

हथखोज देमार (पाटन)

 तालपुरी भिलाई छत्तीसगढ़

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