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कृष्ण 

कृष्ण 

 

चल मन अब पिया के देश 

वहा न मोह और न ममता 

वहा न कष्ट और क्लेश ।

वहा न बिछड़न न तडपन

वहा रहे हर पल संग संग ।

दिन और रात 

दिन और रात ।

जहां जाये संग रहे 

पिय सुख मे रहे 

पिय सुख मे रहे ।

न कही अपयश 

न कही शिकायत

न कही कोई पाप ।

न कही कोई पुन्य 

रैन दिन मस्त 

रहे पल पल ।

ना शारीरिक मोह

और ना कोई ममता 

हर पल रहे संग ।

मिलते रहे हर छन 

मन मयूर नाचे हर पल 

मस्त मस्त हो कर ।

न कोई अड़चन 

न कोई धड़कन 

न कोई जकड़न ।

मजबूरी न कोई अब

तमन्ना न कोई अब

चल मन अब पिया के देश 

 

नीलम प्रभा सिन्हा

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