मध्य प्रदेश

शासकीय कन्या महाविद्यालय, में प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन में इको क्लब, वनस्पति शास्त्र विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में एक इको-फ्रेंडली कार्यशाला का आयोजन किया गया।

 

शासकीय कन्या महाविद्यालय, में प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन में इको क्लब, वनस्पति शास्त्र विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में एक इको-फ्रेंडली कार्यशाला का आयोजन किया गया।

 

 

कटनी।शासकीय कन्या महाविद्यालय, में प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन में इको क्लब, वनस्पति शास्त्र विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में एक इको-फ्रेंडली कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में छात्राओं ने भगवान एवं मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों का उपयोग करके विभिन्न सामग्रियों जैसे कपूर, दालचीनी, घी, गुड़, काली मिर्च, तेज पत्ता आदि मिलाकर धूपबत्ती का निर्माण किया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को पूजन सामग्री को नदियों एवं जलाशयों में प्रवाहित करने से रोकना तथा उन्हें स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करना था।

प्राणी शास्त्र विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. साधना जैन ने कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए छात्राओं को “वेस्ट से बेस्ट” निर्माण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मार्गदर्शन प्रदान करते हुए बताया कि मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों का उपयोग करके हम अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रख सकते हैं तथा लघु उद्योग की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। साथ ही, उन्होंने धूपबत्ती निर्माण की प्रक्रिया का विस्तार से प्रदर्शन किया, जिससे जलाशयों एवं नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके।

प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने छात्राओं की प्रशंसा करते हुए उन्हें प्रेरित किया कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास उनके भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने छात्राओं को कई उपयोगी टिप्स भी प्रदान किए, जिन्हें वे आगे चलकर रोजगार के रूप में विकसित कर सकती हैं।

कार्यशाला के दौरान महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. विमला मिंज, डॉ. रश्मि चतुर्वेदी एवं डॉ. अपर्णा मिश्रा ने छात्राओं द्वारा निर्मित धूपबत्तियों का अवलोकन किया तथा उनकी सराहना की।

कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन इको क्लब प्रभारी डॉ. रीना मिश्रा द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. आशुतोष द्विवेदी, श्रीमती आरती वर्मा, श्रीमती मीनाक्षी वर्मा, श्रीमती सुषमा वर्मा एवं श्रीमती संध्या सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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