
विधा:–भजन
शीर्षक:–जब जब सावन आता हैं।
धरती नदियाँ पावन करने
संतजनों का दुख हरने
शिव पार्वती संग धरा पर आते हैं।
भक्तों का उद्धार करते हैं।।
काँवरिया कांवड़ काँधे धरकर
नंगे पांव चलता हैं।
तेरी भक्ति में बाबा भक्त मग्न हो जाता हैं।।
जब जब सावन आता हैं
मन केसरिया हो जाता हैं।।
जब जब सावन आता हैं।
बाबा जयकारा छा जाता हैं।
बोल बम बोल बम का नारा
भक्तों के स्वर में गूँजता हैं।।
तन मन पावन पावन हो जाता हैं।
धरा भक्तिमय हो जाता हैं।।
जब जब सावन आता हैं।
मन केसरिया हो जाता हैं।।
जब जब सावन आता हैं।
शिवालय में बाबा श्रृंगार निराला होता हैं।
दूध दही घी शहद गंगाजल
कर्पूर चंदन अक्षत रोली
भांग धतुरा बिल्वपत्र से पूजा अर्चना होता हैं।।
जब जब सावन आता हैं।
मन केसरिया हो जाता हैं।।
स्वरचित:–डॉ अनुपम भारद्वाज मिश्रा




