मेरी बेटी और बहू

मेरी बेटी और बहू
दोनों हैं एक तरह न कम और न ज्यादा
दोनों घर की मान घर की इज्जत
बेटी हमारी प्यारी प्यारी
तारा है मेरी आँखों की
पापा की परी
मम्मी की दुलारी
घर की शान
मेरे घर की लाज
बिटिया मेरी जान
मेरे घर की लक्ष्मी
जैसी मेरी बेटी सीखेगी संस्कार
वैसी ही बनेगी वह ससुराल
बहू मेरी गृह लक्ष्मी
आने वाला और शान विश्व की
बहू कुल की लक्ष्मी होगी
इसी खानदान की नाक होगी
अपने पति की रानी होगी
घर की सारी जिम्मेदारी लेगी
कर्तव्य से न कभी चूकेगी
हर चीज अपनानी अपने मन से ही
सास ससुर की आँखों की तारा होगी
अपने कुल को वारिस देगी
घर-सुंदर और स्वस्थ बनानी
बहू विश्व की खुशबू, हँस हँस कर हर पल
बहू ही बेटी बनी अपने सास ससुर की
बुढ़ापे के अंतिम क्षण में वो ही
साथ रहेगी मान देगी सम्मान देगी
जब बहू से बेटी बन जाती कब पता नहीं
दोनों हैं एक तरह न कम और न ज्यादा
नीलम प्रभा सिन्हा




