E-Paperसाहित्य रचना
मां का जादू

मां का जादू
खुदा से मांग हमको, इस दुनिया में जो लाये।
ऐसा कोई जादू, मां तू ही तो कर पाये।।
खुदा से मांग हमको ………
नन्हे से कदम मेरे, चलने में डगमगाए।
थाम कर तू उंगली, मुझे मंजिल तक ले पहुंचाए।।
बीच राह में जो, कभी धोखा ना दे जाए।
ऐसा कोई जादू……
अश्कों से कभी जो, मेरी आंखें नम हो जाएं।
पास में बुलाके, मुझे सीने से लगाए।।
अश्क मेरे सारे, तेरे आंचल में गुम हो जाएं।
ऐसा कोई जादू…
जीवन के सफ़र में,जब भी पड़ी अकेली।
तू चुपके से आकर,बन गयी मेरी सहेली।।
ग़म सारे लेकर भी, जो खुशियां ही दे जाए।
ऐसा कोई जादू….
दीप्ति गुप्ता ‘दीप’
फर्रुखाबाद




