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शीर्षक प्रकृति हम-सब
प्रकृति का संदेश सुनो, जीवन का आधार यही।
हम सब मिलकर रखें इसे, सबसे बड़ा उपहार यही।।

हरी भरी ये धरती माता, देती हमको शीतल छांव।
नदियाँ पर्वत वन उपवन, सजते जैसे सुंदर गांव।।

सीख यही हर पीढ़ी पाए, वृक्ष लगाना पुण्य महान।
प्रकृति रक्षा से ही संभव, खुशियों वाला नया विहान।।

वैश्विक परिदृश्य बताता, संकट गहरा आता है।
जब मानव प्रकृति से खेले, मौसम भी डर जाता है।।

कहीं सूखा कहीं बाढ़ें, कहीं धधकती गर्म हवाएँ।
मानव की गलतियों से ही, बदल रहीं सब ऋतुएँ।।

हम सब मिलकर प्रण ये लें, प्रकृति का सम्मान करें।
जल जंगल और जीवों का, हर पल मिल संरक्षण करें।।

सीख यही विद्यालय दे, स्वच्छ बने हर घर आंगन।
हरियाली से महके जग, खुशियों से भर जाए जीवन।।

प्रकृति ईश्वर का उपहार, इसे न व्यर्थ गंवाना है।
आने वाली हर पीढ़ी को, सुंदर जग दे जाना है।।

डॉ राम शरण सेठ
छटहाॅं मिर्जापुर उत्तर प्रदेश

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