
स्वरचित – कविता – विषय – भीमराव अम्बेडकर..
समता की राह पर चलकर
जिसने नया इतिहास बनाया था
अँधेरे में दीप जलाकर
हर इंसान को समझाया था.
गरीबी में जन्म लिए
हौंसले उनके अपार थे
शिक्षा को अस्त्र बनाया था
जीवन भर संघर्ष से, संविधान का स्वरूप सजाया था
धूल भरी राहों में उनका एक कठिन सफर था
जिसमें उन्हें हर मोड़ पर तिरस्कार मिला था
प्यास लगने पर वह जल को छू भी न सके
उन्हें एक ऐसा संसार भी मिला था…
विद्यालय के आँगन में बैठे
पर मन में अपार घाव लिए
ज्ञान की अलख जगानी थी
इसीलिए हर घाव पिए…
रातों में नींद खोकर भी
दिनोदिन सपनों को सींचा था
टूटे मन को जोड़ -जोड़ कर
आशा की किरण का दीपक खींचा था
सदियों से दबे थे जो
आवाज जिनकी खो गयी
अधिकारों की राह में हर उम्मीद भी सो गयी……
जन्मे एक ऐसे महापुरुष, जिन्होंने
कलम से क्रांति की राह बनाई
संविधान का स्वरूप सजाया था
दलितों के अधिकार हेतु
जीवन पर संघर्ष निभाया था…
नमन मेरा ऐसे महापुरुष को
सपना जिनका साकार था
हर इंसान को समता का भाव मिले यही उनके विचारों का आकार था…
नाम -ललिता डोभाल,’प्रज्ञा ‘
पता -बड़कोट, उत्तरकाशी (उत्तराखंड )




