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विषय-शौक़ को ज़िंदा रखें,जीवन में खुशियों भरें।

विषय-शौक़ को ज़िंदा रखें,जीवन में खुशियों भरें।
मैंने भी कुछ शौक सँजोए,
मन के मंदिर में पाले हैं,
उन कोमल स्वर्णिम सपनों ने,
जीवन में किए उजाले हैं।
बच्चों को ऊँची उड़ान मिले,
यह स्वप्न हृदय में धारा था।
विदेश धरा पर नाम कमाएँ,
यही मन का सपना प्यारा था।
पर जड़ से रहे उनका नाता अटूट,
संस्कारों से वे दोनों बँधे रहे।
माता-पिता के पावन वचन,
उनका जीवन-पथ गढ़ते रहें।
आज्ञा,आदर,करुणा व सेवा,
ये भाव ही उनके आभूषण हों।
सफलता के शिखर पर जाकर,
विनम्रता उनके हर कर्म में हो।
मेरी एक और मधुर अभिलाषा,
दया-स्नेह का सर्वत्र प्रसार करूँ।
विश्व-धरा के कोने-कोने में,
ख़ुशियों का मधुर संचार करूँ।
इन शौकों को जीते-जीते,
जीवन सच्चा उत्सव बन गया।
हर दिन नव आनंद से भरकर,
मेरा जीवन हर्षित कर गया।
मंजूषा दुग्गल
शिक्षिका
/ कवयित्री/ लेखिका
करनाल (हरियाणा)




