विषय – न जाने क्या-क्या बदला

अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मित्र मंडल जबलपुर
फेसबुक प्रतियोगिता हेतु
विषय… … . “न जाने क्या-क्या बदला”
दिनांक… 27/11/2025
नाम.. अर्चना होता
आई डी नंबर.. 2232
विषय – न जाने क्या-क्या बदला
शीर्षक – छूट न गया बचपन
“ याद करके अपने बचपन के पल
पुलकित हो उठा उदासीन सा मन
हर पल रहता था इंतजार
कब हो जाऊं मैं बड़ा,
बड़े होने का एहसास, गुदगुदा जाता था मन को
बड़ा हो जाऊँगा तब कोई,
मुझे ना रोकेगा ना टोकेगा
कर पाऊंगा अपने मन की
उन्मुक्त हो कर छू लूँ गा आसमां को
छूट गया सुनहरा वो पल रह गयी यादें बस
अब एहसास होता है जीता था मैं बचपन में
अब तो सिर्फ जिम्मेदारी ही निभा रहा हूँ,
अब तो पलकों में सिर्फ यादें बची है
ना जाने क्या-क्या बदल गया
छूट गया हाथों से यादों का कारवां
बचपन छूटा छूट गया हरपल वो सुहाना
बदल गया जीवन का कारवां
सोचता हूँ, न जाने क्या क्या बदल गया।”
स्वरचित कविता
अर्चना होता (ओडिशा)




