मध्यप्रदेश में अफसरशाही पर सबसे बड़ा सवाल उस वक्त उठा, जब कलेक्टर-एसपी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रशासनिक सिस्टम की सच्चाई सामने रख दी।

मध्यप्रदेश में अफसरशाही पर सबसे बड़ा सवाल उस वक्त उठा, जब कलेक्टर-एसपी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रशासनिक सिस्टम की सच्चाई सामने रख दी।
सुशासन पर चर्चा के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि
प्रदेश में लोगों की शिकायतों को अटेंड ही नहीं किया जा रहा।कलेक्टर, एसपी, कमिश्नर और सचिव स्तर तक लाखों शिकायतें लंबित पड़ी हैं।
बैठक में भ्रष्टाचार और पैसे के लेन-देन पर बात करते हुएमुख्य सचिव ने वह बात कह दी, जो आम जनता वर्षों से कहती आ रही है—
“सीएम कहते हैं कि कोई कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं कर रहा।”इस पर मुख्य सचिव ने दो टूक कहा—
“ऐसी बात नहीं होनी चाहिए। जो भी ऐसा भ्रष्टाचार कर रहा है, उसे हटा दीजिए।”यानी साफ संदेश दिया गया कि
अगर कोई अधिकारी पैसे लेकर काम कर रहा है, तो उसके लिए सिस्टम में कोई जगह नहीं है।वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह भी सामने आया कि
कई जिलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं की जा रही,और शिकायतें ऊपर तक पहुंचने से पहले ही दबा दी जाती हैं।
इसी दौरान इंदौर जिले का उदाहरण सामने आया,जहाँ शिकायत पर सवाल उठाने पर पुलिस कमिश्नर वीडियो स्क्रीन पर मौजूद नहीं थे।
फोन किया गया तो वह स्विच ऑफ मिला।




