दुनिया

शीर्षक – थकान क्या है नहीं पता मुझे इस बात का

 

शीर्षक – थकान क्या है नहीं पता मुझे इस बात का

 

सूरज को देखो ,

कभी थकता नहीं 

दिन रात वह चलते रहता है।

प्रकाश फैलाकर जीवन देता है।

सबके लिए वह समर्पित रहता है।

सूरज की तरह बनों जो कभी 

थकता नहीं।

 

भरो निराशा ना जीवन में 

झांको देखो अपने मन में।

मानव का प्रयास ही कर्म है।

 

सौनिक देश की रक्षा के लिए 

वह हरदम तैयार रहता है।

सौनिक की वाणी में देशभक्ति 

की धुन है।

थकान क्या है पता नहीं।

 

मैं एक नारी हूं।

मैं तो मजबूत हूं।

जीवन की हर परिस्थितियों 

में खड़ी रहती हूं।

 

मैं एक मां हूं, जीवन की 

चुनौतियों का सामना करती हूं।

 

सफर है लंबा,

जिंदगी का मतलब है इम्तिहान।

हौसले की उड़ान में इरादों को 

मक़सद बनाओं।

प्रगति पथ पर हिम्मत से कदम

बढ़ाओ।

थकान क्या है पता नहीं मुझे इस बात पर,

मैं तो एक लक्ष्य हूं,

जो पाना चाहता हूं।

 

 

राजलक्ष्मी अग्रवाल, गुवाहाटी।

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